बहुत वर्ष बीत गए
पर न आई हम से मिलने बारिश,
पत्ते मेरे झर गए थे,
और प्यास बुझी थी मेरे आंसू से।
दिन-रात उसका नाम पुकारा,
बादलों को किया इशारा,
लेकिन, न आए वह ईस और
रह गई मैं अकेली, दुःख के जाल में फंसी।
बहुत वर्ष बीत गए थे,
और न आई थी वर्षा
पर न भूली थी मैं बारिश के पानी का स्वाद
ईस मित्र के संग बिताए पल, मुझे थे याद।
जब भी मेघ गरजते,
मेरे हृदय में खिलती एक मुस्कान।
जब भी बूँदें बरसती,
था वह मेरे लिए एक गान।
जब भी एक बूँद मेरे पत्तो पर गिरती,
लगता था जैसे वह मुझे चूम रहीं,
जब भी धरती को वह छूती,
लगता था वह हंस रही।
मेरे दुविधाओं mitaati थी बारिश
मेरे बीमारियों की दवा थी बारिश,
खुशियों की बूंदे थी बारिश
अंधेरे में आशा थी बारिश।
इस प्रिया सहेली का कर रही मैं इंतज़ार,
न जाने आएगी वह कब,
न जाने क्या लाएगी वह अपने संग
पर एक बात तो निश्चित है,
की मेरे ज़िन्दगी में वह भरेगी रंग।
-कमलिनी
9 comments:
sorry..its -meri duvidhaaon KO mitaati thi baarish-.....
akhikar baarish aa hi gayee!!!
maine pura patha nahi,but sounds great!
to pura padh!!!!!!
meri maa ka dil bhar aaya...my maa just luved ur poem she read it 2-3 times
by the way how did u get the hindi script
hey!? i had posted a comment before prerna but its not here!!
nvm lovely poem though. keep it comin!! this is what the blog's for!
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